कृषि आदान विक्रेता के लिए स्नातक अर्हता अनिवार्य

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बालाघाट। भारत का राजपत्र, नई दिल्ली, 05 नवम्बर 2015 (कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय कृषि, सहकारिता और किसान कल्याण विभाग) द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार कीटनाशी अधिनियम 1968 एवं कीटनाशी नियम 1971 में उपनियम अंत: स्थापित किया गया है। इसके अनुसार एक व्यक्ति विक्रय, स्टॉक या विक्रय के लिये प्रदर्शन या कीटनाशकों के विक्रय के लिए अनुज्ञप्ति (लायसेंस) प्रदान करने आवेदन करता है, तो वह या उसके अधीन इस प्रयोजन के लिए नियुक्त कर्मचारी को कृषि विज्ञान या जैव रसायन या जैव प्रौद्योगिकी या जीवन विज्ञान या रसायन विज्ञान या वनस्पति विज्ञान या प्राणी विज्ञान में स्नातक डिग्री के रूप में न्यूनतम अर्हता होना चाहिए। परन्तु सभी फुटकर विक्रेता या डीलर जो इस उपनियम की अधिसूचना की तारीख को विधिमान्य अनुज्ञप्ति (लायसेंस) धारण करता हो, उन्हे शैक्षिक अर्हता प्राप्त के लिये दो वर्ष का समय दिया जाएगा। उप संचालक कृषि श्री राजेश त्रिपाठी ने जिले के सभी कृषि आदान विक्रेताओं को कीटनाशी अधिनियम का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिये है। इसी प्रकार भारत का राजपत्र, नई दिल्ली, शनिवार, 10 अक्टूबर 2015 (कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय कृषि, सहकारिता और किसान कल्याण विभाग) के आदेश अनुसार उर्वरक (नियंत्रण) चौथा संशोधन आदेश, 2015 में उपखंड स्थापित किया गया है। इस आदेश के अधीन किसी आवेदक को तब तक प्राधिकरण पत्र प्रदान नहीं किया जायेगा जब तक आवेदक किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से कृषि विज्ञान, रसायन विज्ञान में स्नातक या कृषि विज्ञान में डिप्लोमा या राष्ट्रीय कृषि विस्तार प्रबंधन संस्थान (एम.ए.एन.ए.जी.ई.), राष्ट्रीय पादप स्वास्थ्य प्रबंधन संस्थान (एन.आई.पी.एच.एम.) और अन्य सरकार द्वारा अनुमोदित संस्थानों से 6 मास की अवधि का कृषि इन्पुट में प्रमाण पत्र धारक न हो। ऐसे डिलर, जिन्हे उर्वरक (नियंत्रण) चौथा संशोधन आदेश, 2015 के प्रवृत्त होने के पूर्व प्राधिकरण पत्र प्रदान किया गया है, से उनके अधिकार पत्र के नवीनीकरण के समय उक्त अर्हताओं को रखने की अपेक्षा नहीं होगी। परन्तु यह और कि उक्त अर्हताएं रजिस्ट्रीकृत कृषि सहकारी संस्थाओं और राज्य विपणन परिसंघों को लागू नहीं होगी, किन्तु वे इन अर्हता रखने वाले किसी व्यक्ति को नियोजित करेंगे। यह राजपत्र में इनके प्रकाशन की तारीख को प्रवृत्त होगें।

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