कृषकों की आय बढ़ाने में जैविक खेती की महत्वपूर्ण भूमिका

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भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की 87वीं वार्षिक आम बैठक

(नई दिल्ली कार्यालय)
नई दिल्ली। श्री राधा मोहन सिंह, केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री तथा अध्यक्ष, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने कृषि में आधुनिक तकनीकों के विकास और उनके निरंतर बढ़ते प्रयोग के लिए कृषि वैज्ञानिकों की सराहना की है।
उन्होंने कृषि वैज्ञानिक समुदाय की कृषि से संबंधित बाधाओं को दूर करने प्रतिबद्धता के लिए भी तारीफ की है। उन्होंने कृषकों के खेतों में बड़ी संख्या में प्रौद्योगिकी प्रदर्शनों के आयोजन पर भी संतोष व्यक्त किया। इसके साथ ही उन्होंने कृषकों में प्रौद्योगिकी एवं ज्ञान सुदृढ़ीकरण की आवश्यकता पर बल देते हुए इस कार्य में तेजी लाने को कहा। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने कृषकों की आय बढ़ाने में जैविक कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी जोर दिया।
इस क्रम में उन्होंने मृदा स्वास्थ्य की तुलना मानव स्वास्थ्य से करते हुए अन्य राज्यों में भी सिक्किम की जैविक खेती के मॉडल को अपनाए जाने की आवश्यकता पर बल दिया। हाल ही में प्रधानमंत्री ने सिक्किम को जैविक प्रदेश घोषित किया था। कृषि मंत्री आईसीएआर की 87वीं वार्षिक आम बैठक को संबोधित कर रहे थे।
श्री मोहनभाई कुंडारिया, केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री ने अपने कृषि वैज्ञानिकों से उत्पादन लागत में कमी लाने और उत्पादन में बढ़ोतरी पर आधारित प्रौद्योगिकियों के विकास का आह्वान किया।
इस अवसर पर गन्ना प्रजनन संस्थान, कोयम्बटूर द्वारा विकसित मृदा नमी संकेतक तथा आईसीएआर, नई दिल्ली द्वारा विकसित लगभग शून्य इरुसिक अम्ल वाली सरसों की किस्म ‘पूसा मस्टर्ड-30Ó के बीज और तेल को भी जारी किया। इससे पूर्व डॉ. एस अय्यप्पन, सचिव, डेयर एवं महानिदेशक, आईसीएआर ने परिषद की हाल की उपलब्धियों पर प्रस्तुति दी और कृषि की उभरती चुनौतियों का सामना करने के लिए आईसीएआर की नई पहलों और लक्ष्यों के बारे में विस्तापूर्वक जानकारी दी।
इस अवसर पर श्री सी राउल, अपर सचिव, डेयर एवं सचिव आईसीएआर,श्री एस.के. सिंह, अपर सचिव, डेयर तथा वित्त सलाहकार भी उपस्थित थे।

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