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किसान हित सर्वोपरि हो

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देश के किसानों ने खेती-किसानी पर नोटबन्दी का कोई असर नहीं होने दिया। अच्छी वर्षा का भरपूर फायदा लेते हुए देश के किसानों ने रबी फसलों की बुआई  पिछले वर्ष की तुलना में 6.13 प्रतिशत अधिक क्षेत्र में की है। यह एक बड़ी उपलब्धि है। यहां रबी में मोटे अनाजों व धान का रकबा जहां क्रमश: 5.9 व 23.4 प्रतिशत कम हुआ वहां दलहन व गेहूं के रकबे में क्रमश: 7.6 प्रतिशत व 11.01 प्रतिशत वृद्धि हुई है। देश में पिछले वर्ष जहां गेहूं की फसल 289.07 लाख हेक्टर में ली गई थी। वहां इस वर्ष यह 309.60 लाख हेक्टर में बोई गई है। गेहूं की बुआई में 20.53 लाख हेक्टर की यह वृद्धि एक साधारण वृद्धि नहीं है। यह इस वर्ष गेहूं के उत्पादन में 5 लाख टन अतिरिक्त की ओर इशारा करती है। अब राज्य सरकारों का यह दायित्व बन जाता है कि इस अतिरिक्त उत्पादन की उपयुक्त क्रय  तथा भंडारण व्यवस्था के लिये अभी से प्रयास आरंभ कर दें अन्यथा अव्यवस्थित भंडारण के कारण किसानों की इस मेहनत पर पानी न  फिर जायेगा।
देश के किसानों में देश ने दलहन की आवश्यकता को देखते हुए रबी दलहनों की बुआई 11.01 प्रतिशत अधिक क्षेत्र में की है। पिछले वर्ष जहां दलहनी फसलें 139.93 लाख हेक्टर में ली गई थी वहीं इस वर्ष इनकी बुआई 155.35 लाख हेक्टर में की गई है। इस वर्ष दलहनी फसलों के उत्पादन में उसके क्षेत्र के बढऩे के कारण 11 प्रतिशत उत्पादन में वृद्धि की आशा तो की जा सकती है। पिछले कुछ माहों में दलहनी फसलों की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। खरीफ दलहनी फसलों के बुआई के रकबे में भी किसानों ने सकारात्मक वृद्धि की थी। परंतु किसानों को अब वह भाव नहीं मिल पा रहे हैं जिसकी आशा में उन्होंने दलहनी फसलों के रकबे में वृद्धि की थी। अब रबी दलहनी फसलों के रकबे में वृद्धि कर किसान उनकी कीमतों को लेकर दुविधा में पढ़ गया है। अब राज्य सरकारों का दायित्व बनता है कि वह रबी दलहनी फसलों को न्यूनतम क्रय मूल्य में क्रय करने की व्यवस्था करें ताकि किसान को उसकी फसल का उचित मूल्य मिल सके अन्यथा किसानों का खेती के प्रति मोहभंग हो गया तो इसके दूरगामी परिणाम होंगे।

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