किसान की आय दोगुनी कैसे होगी ?

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भारत सरकार के कृषि तथा कृषक कल्याण मंत्रालय ने एक समिति का गठन किया है जो किसानों की आय मार्च 2022 तक दुगना करने के ध्येय को हासिल करने के लिये अपने सुझाव देगी। यह सूचना दिनांक 7 फरवरी 2017 को केन्द्र सरकार के कृषि राज्य मंत्री श्री पुरुषोत्तम रूपाला ने लोकसभा के प्रश्न के उत्तर में दी। इस समिति की अध्यक्षता मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव करेंगे। यह समिति किसानों तथा कृषि मजदूरों के वर्तमान आय के स्तर का अध्ययन करने के साथ-साथ वर्तमान आय के स्तर व पिछली वृद्धि दर को नापने का कार्य भी करेगी। साथ ही यह भी पता लगायेगी कि इस उद्देश्य को प्राप्त करने हेतु किस वृद्धि दर की आवश्यकता होगी, जिससे किसान तथा कृषि मजदूरों की आय     2021-22 तक दुगनी की जा सके। इसको प्राप्त करने के लिये कौन सी विभिन्न योजनायें अपनानी पड़ेगी, इसके भी सुझाव समिति देगी। समिति को उद्देश्य प्राप्त करने के लिए इसके पुनरावलोकन व प्रबोधन के लिये संस्थागत तंत्र की भी अनुशंसा करनी है। समिति इस विषय से संबंधित अन्य विषयों में भी विचार करेगी।
भारत सरकार का किसान की आय को अगले पांच साल में दुगना करने के प्रयास के लिये समिति का गठन एक सराहनीय कदम है। परंतु किसान की आमदनी दुगनी करने के लिये सरकार क्या प्रयास करेगी यह समिति की अनुशंसा आने के बाद ही पता पड़ पायेगा। समिति की अभी तक पाँच बैठकें हो चुकी है।  परंतु उसका दृष्टिकोण अभी पता नहीं पड़ पाया है। यदि किसान की आमदनी दुगनी करनी है तो हमें उसके द्वारा ली जाने वाली फसलों की उत्पादकता बढ़ानी होगी। यदि समिति को यह ध्येय दिया गया होता तो अधिक उचित रहता। दूसरी ओर किसान की आय तब तक नहीं बढ़ सकती जब तक उसे उसके उत्पादों का उचित मूल्य नहीं मिलता व उसकी मेहनत का मूल्य एक मजदूर की तरह न आंक कर एक प्रबंधक के रूप में नहीं आंका जाता। किसान अपने उत्पादों  के मूल्य के संबंध में हमेशा ठगा जाता रहा है। वर्तमान का उदाहरण ही ले तो अरहर की देश में कमी तथा उसके चढ़ते भावों के कारण पिछले वर्ष पूरे देश में यह एक चर्चा का विषय रहा। अरहर के न्यूनतम समर्थन मूल्य से लगभग दुनी कीमत में अरहर बाजार में बिक रही थी। भारतीय किसान इसकी आपूर्ति के लिए अपनी परम्परागत फसल न लेकर व जोखिम उठाकर अरहर की खेती के लिये आगे आया। अब फसल आने पर इसके भाव समर्थन मूल्य से कहीं कम आ गये हैं।  यह कौन और कैसे करता है यह पता लगाने के लिये समिति की आवश्यकता है। सरकारें भी पूरी फसल को समर्थन मूल्य पर लेने को तैयार नहीं। अन्य फसलों के साथ भी ऐसा होता आया है। यदि सरकार अगले पांच साल में  किसान की आय दुगना करना चाहती है तो उसे किसानों के उत्पादों का उचित मूल्य देना होगा, जो वह बिना कोई समिति बनाये ही कर सकती है।

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