किसानों को कर्ज पर 60 दिन का ब्याज माफ

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नई दिल्ली। नोटबंदी के दर्द को दूर करने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की बड़ी घोषणाओं का देश के करीब 14 करोड़ किसान परिवारों पर सीमित प्रभाव पडऩे की संभावना है। इन घोषणाओं में नकदी के संकट की असल समस्या के समाधान के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया है।
श्री मोदी ने 2016 के बुआई सत्र में ज्यादा रकबे में रबी की फसल की बुआई और ज्यादा मात्रा में खाद की खरीद के लिए किसानों को धन्यवाद दिया और घोषणा की कि जिन किसानों ने  रबी की फसल के लिए जिला सहकारी बैंकों (डीसीबी) से और प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (पीएसीएस) से कर्ज लिया है, उन्हें ऐसे कर्ज पर 1 जनवरी से 60 दिन के ब्याज का भुगतान नहीं करना होगा। साथ ही जिन लोगों ने नवंबर और दिसंबर 2016 के लिए ब्याज का भुगतान कर दिया है, सरकार उन्हें पैसे वापस करेगी।
2016-17 वित्त वर्ष में केंद्र सरकार ने 9 लाख करोड़ रुपये कृषि ऋण दिए जाने का लक्ष्य रखा है, जिसमें से अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों का अधिकतम हिस्सा है। केंद्र सरकार ने पिछले महीने में ही फसल ऋण के भुगतान की तिथि 2 महीने बढ़ा दी थी, जिसका भुगतान 1 नवंबर से 31 दिसंबर के बीच करना है।
प्रधानमंत्री ने अपनी दूसरी घोषणा में कहा कि नाबार्ड को किसानों को क्रेडिट व कर्ज देने के लिए 2016-17 वित्त वर्ष में 20 हजार करोड़ रुपये अतिरिक्त मुहैया कराए जाएंगे। बहरहाल 40 प्रतिशत से ज्यादा किसान संस्थागत क्रेडिट व्यवस्था से अलग हैं, ऐसे में इस कदम का भी सीमित असर होगा।  किसानों को सस्ती दरों पर कर्ज देने के लिए नाबार्ड को 23 नवंबर को 21 हजार करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता मुहैया कराई गई थी।
कृषि लागत और मूल्य आयोग के पूर्व चेयरमैन प्रोफेसर अशोक गुलाटी ने कहा, 1990 के दशक के बाद से ही कृषि क्षेत्र में संस्थागत ऋण की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत के करीब स्थिर है, बहुत कोशिश के बाद भी इसमें सुधार नहीं हुआ है। श्री मोदी ने यह भी घोषणा की है कि 1 जनवरी से सभी 3 करोड़ किसान क्रेडिट कार्डों (केसीसी) को रुपे कार्ड में बदल दिया जाएगा, जिससे किसान आसानी से नकदी निकाल सकेंगे।

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