ओजोन संरक्षण : एक चुनौती

पृथ्वी पर उपस्थित स्ट्रेटोस्फीयर परत सूर्य के प्रकाश में उपस्थित अधिकतर अल्ट्रावायलर किरणों का अवशोषण करती है। सबसे पहले ओजोन परत को एक अंग्रेेजी भौतिक शास्त्री स्4स्रठ्ठद्ग4 ष्टद्धड्डश्चद्वड्डठ्ठ ने 1930 में खोजा था। ऑक्सीजन का टकराव अल्ट्रावायलट किरणों से होने से ओजोन परत का निर्माण होता है। सूर्य के प्रकाश में अनेक हानिकारक किरणें जैसे- ङ्ग किरणें तथा अल्ट्रावायलट किरणें पायी जाती हैं जो मानव तथा अनेक जन्तुओं के लिए बहुत ही हानिकारक होती है। ओजोन परत इन हानिकारक किरणों को ऊपर ही रोक लेती है तथा इन्हे पृथ्वी पर नहीं आने देती।
वायुमण्डल में अनेक ग्रीन हाऊस गैसों जैसे कार्बन-डाई-ऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रस ऑक्साइड, मिथेन, सल्फर डाईऑक्साइड तथा ऐयर कन्डीसनर और रेफरिजरेटर से निकलने वाली सी.एफ.सी. (क्लोरो फ्लोरो कार्बन) आदि जहरीली गैसों के उत्सर्जन से ओजोन परत में छेद निरन्तर बढ़ता जा रहा है जिससे सूर्य की हानिकारक अल्ट्रावायलट किरणें तथा एक्स किरणें पृथ्वी पर रहने वाले जीवों पर हानिकारक प्रभाव डाल रही है। अल्ट्रावायलट किरणें आँखों के लिए खतरनाक होती है तथा इसके अलावा इनसे स्किन कैंसर आदि रोग होते हैं। इन सभी ग्रीन हाऊस गैसों के उत्सर्जन से पर्यावरण प्रदूषित होता है तथा अनेक नयी-नयी बीमारियाँ जन्म लेती हैं। इन सबकी वजह से ही आज ग्लोबल वार्मिंग तथा क्लाइमेट चैंज आदि हो रहा है। जिसके फलस्वरूप बेमौसम बारिश, अतिवृष्टि तथा अनावृष्टि आदि हेाती है। इसके फलस्वरूप फसल उत्पादन तथा जीव जंतुओं के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है।
वर्ष 1928 में सीएफ.सी. (क्लोरो फ्लोरो कार्बन) नामक गैस की खोज हुई थी। सीएफ.सी. गैस इतनी खतरनाक है कि यह वायुमण्डल में 100 साल से भी ज्यादा समय तक अस्तित्व में रह सकती है। वैज्ञानिकों के अनुसार 2 प्रतिशत से अधिक ओजोन परत नष्ट हो चुकी है। वातावरण में कई गैसें ओजोन को जोडऩे के या ओजोन की सुरक्षा के लिए छोड़ी गयी है। लेकिन इनका प्रभाव लगभग एक शताब्दी बाद नजर आयेगा। ये गैसें ओजोन परत में रिक्त स्थान को भरने के लिए छोड़ी गयी हैं।
हम अपने आसपास जो भी चीज देखते हैं वह प्रकृति की लाखों साल की विकास प्रक्रिया का परिणाम है। अपने स्वार्थ मात्र के लिए प्रकृति से छेड़छाड़ करना समस्त जीवों के लिए हानिकारक है। इस पृथ्वी पर प्रत्येक चीज का अपना महत्व है इस बात को हमें समझना होगा। सम्पूर्ण मानव जाति को जागरूक करने के लिए प्रतिवर्ष 16 सितम्बर को विश्व ओजोन दिवस मनाया जाता है जिससे ओजोन को बचाया जा सके। ओजोन को बचाने की चुनौती सरकार या किसी एक देश या एक आदमी की नहीं बल्कि हम सभी की है। अत: हम सबको मिलकर ओजोन को बचाने के लिए हर सम्भव प्रयास करने होंगे जिससे कोई ठोस परिणाम निकल सकें।

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