अनुभव भी जुड़े आदर्श ग्राम में

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की महत्वाकांक्षी सांसद आदर्श ग्राम योजना का शुभारंभ गत 11 अक्टूबर को नई दिल्ली के विज्ञान भवन से दिशा निर्देश जारी करने के साथ हुआ। इस योजना के पीछे प्रधानमंत्री की सकारात्मक सोच ‘यदि हमें राष्ट्र को निर्माण करना है तो हमें इसे गांवों से आरंभ करना होगा थी। इस योजना में प्रत्येक सांसद द्वारा चयनित गांव का समग्र विकास सन् 2016 तक करना है ताकि उसे आदर्श गांव के रूप में देखकर, आसपास के गांवों को भी प्रेरणा मिले और वह अपने गांव के लिये प्रयत्नशील है। यह गांव विकास की प्रक्रिया चलती रहे इसलिये यह सांसदों का गांवों के विकास के प्रति उदारशीलता का पहला परिचायक है। 2017 से 2019 तक दो अन्य गांवों को चयनित कर उनका भी विकास करना है। अभी भी कुछ ऐसे सांसद हैं जिन्होंने अभी तक अपने क्षेत्र के गांव का चयन तक नहीं किया है। जिनमें से तीन सांसद मध्यप्रदेश से हैं। इस प्रकार की नकारात्मक सोच गांव व देश के विकास की राह में बाधा बन सकती है। इस योजना को 790 ग्रामों में क्रियान्वित हुए एक वर्ष पूरा हो गया है। एक साल के लेखा-जोखा लेने के लिये विगत 23-24 सितम्बर को भोपाल में सांसद आदर्श ग्राम योजना की राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसका उद्देश्य चयनित गांवों की एक वर्ष की विकास की कहानी का सांसद व जिला कलेक्टर द्वारा स्वयं प्रस्तुत करना था जो केंद्र सरकार का इस योजना को गंभीरता से लेने का द्योतक है। इस महत्वपूर्ण कार्यशाला में केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री वीरेन्द्र सिंह ने दोनों दिन उपस्थिति दर्शाई और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान भी उद्घाटन कार्यक्रम में रहे। इस कार्यशाला में 100 सांसद, 125 कलेक्टर, 125 जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालक अधिकारी आमंत्रित थे। 100 आमंत्रित सांसदों में से सिर्फ 31 सांसदों का इस कार्यशाला में उपस्थित रहना एक चिन्ता का विषय है। सांसदों का उन्हीं के क्षेत्र में उन्हीं के द्वारा चयनित गांवों में पिछले एक साल में किये गये कार्यो की समीक्षा के लिये आयोजित कार्यशाला में भाग न लेना उनके द्वारा चुन गये गांव को आदर्श बनाने में बाधा बनेगा। कार्यशाला में हुए विचार- विमर्श व अन्य सांसदों द्वारा किये गये अच्छे कार्यों तथा उनमें आई बाधाओं के निराकरणों के हल के अनुभवों से अनुपस्थित सांसद वंचित रह गये। गांव की हालत सुधारने के लिये कुछ आधारभूत सुविधाओं का होना आवश्यक है। जिनमें आजीविका, शिक्षा, मकान, स्वस्थ, सड़क, स्वच्छ पानी इत्यादि प्रमुख है। चयनित गांवों की समस्याओं की पहचान कर उनके निदान के उपाय व उनका उचित क्रियान्वयन की आवश्यकता है। इसके लिये एक वृहत सर्वेक्षण की आवश्यकता होगी। इस कार्य हेतु निर्वतमान कृषि वैज्ञानिकों, अभियंताओं, शिक्षाविदों, डाक्टरों प्रशासकों आदि जिनकी सामाजिक कार्य में रूचि हो, उनकी सम्मान सहित सेवाएं लेकर ग्रामीण विकास को गति दी जा सकती है।

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