अधिक उत्पादन के लिये मिट्टी जांच जरूरी

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मिट्टी की जांच क्यों आवश्यक है:
1. मिट्टी की उर्वराशक्ति एवं पोषक तत्वों की उपलब्धता ज्ञात करने के लिये।
2. परीक्षण के आधार पर फसल की आवश्यकतानुसार उर्वरकों की मात्रा निर्धारित करने के लिए।
3. ऐसी भूमि जहां उर्वरकों की आवश्यकता नहीं है, वहां उर्वरकों का प्रयोग न करके उनकी बचत करना।
4. विभिन्न क्षेत्रों के लिये मृदा उर्वरता मानचित्र तैयार करना।
5. फसलों की अधिक से अधिक उपज प्राप्त करने के लिए उनकी आवश्यकतानुसार उर्वरकों की सिफारिश तथा सुधारक प्रयोग करने हेतु।
6. उर्वरकों की उपयोग क्षमता में वृद्धि करने के लिए।
जांच के लिये नमूना कब लें :
यदि सघन कृषि की जा रही है तो नमूने एक फसल चक्र में पूरा होने पर प्रतिवर्ष लेना चाहिए, अन्यथा तीन वर्ष में एक बार मिट्टी की जांच करवाना पर्याप्त रहता है।
जांच के लिये नमूना कैसे लें :
एक हेक्टेयर खेत से प्राथमिक नमूना लेने के लिये प्रचयन पद्धति द्वारा 15-16 स्थानों को निश्चित कर लेना चाहिए अंग्रेजी के व्ही आकार का लगभग 20-30 से.मी. गहरा गड्ढा खोदकर खुर्पी की सहायता से ऊपर से नीचे तक (0-20 से.मी.) लगभग 1.5 से.मी. समान मोटाई की दोनों बगलों की तिरछी पर्त निकाल लेनी चाहिए यदि अगर उपलब्ध हो तो उसको 20 से.मी. गहरा धंसाकर उससे नमूने आसानी से और शीघ्रता से लिये जा सकते हैं। इन नमूनों को प्लास्टिक की बाल्टी या तसले में इकट्ठा करना चाहिए, एकत्रित प्राथमिक नमूनों की मिट्टी को एक साफ मोटे कपड़े, कागज या पॉलीथिन के टुकड़े पर उड़ेलकर मिट्टी में मिलाएं इसमें से कंकड़, पत्थर व घास-फूस आदि को बाहर कर फेंक दें और मिट्टी को ऊपर से थपथपा कर समान मोटाई परत बना दें। इसे गोलाई (चपाती के आकार) में कर लें और उसको चार बराबर भागों में एक-दूसरे पर लम्बवत दो व्यास खींचकर बांट दें। आमने-सामने के दो भागों को फेंक दें। इस क्रिया को दोहराते रहें जब तक कि अंत में लगभग 500 ग्राम वजन का नमूना शेष रह जाये। इसको पॉलीथिन या कपड़े की थैली में भरकर व पत्रक डालकर पैक कर दें।
पत्रक में निम्न जानकारी लिखें :
1. किसान का नाम तथा पिता का नाम
2. ग्राम, विकासखंड, तहसील तथा जिला
3. खसरा नं., पहचान तथा क्षेत्रफल
4. खेत में पहले ली गई फसलें
5. खेत में ली जाने वाली अगली फसल
6. सिंचाई के पानी का स्त्रोत
7. नमूना कितनी गहराई से लिया गया है।

मिट्टी का नमूना लेने में आवश्यक सावधानियां :
1. खाद के गड्ढे तथा वृक्षों के नीचे से नमूने न लें।
2. अधिक पोषक तत्व अवशोषित करने वाले क्षेत्र के नमूने एवं जहां केवल आज की फसल ली गई हो तथा डंठल एवं ठूंठ बगैरह खेत में ही छोड़ दिये गये हों, को नमूने अलग-अलग लेने चाहिए।
3. ऐसे क्षेत्र जहां अधिकतर समय पानी भरा रहता है वहां नमूने एकत्र करें।
4. मृदा अपरदन के कारण जिस क्षेत्र में ऊपरी सतह कटकर बह गई हो तो उसके नमूने अलग से लेने चाहिए।
5. यदि नमूना लेने वाला क्षेत्र बड़ा है तो नमूनों की संख्या उसी के अनुरूप बढ़ा देनी चाहिए।
6. एकत्र नमूनों को न तो उर्वरकों के बोरों के पास रखना चाहिए और न ही उनके ऊपर सुखाना चाहिए।
7. नमूने लेते समय इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि किस क्षेत्र उर्वरक का प्रयोग किया गया है तथा किस क्षेत्र में नहीं।
8. नमूनों का सही-सही रिकार्ड रखें।

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