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KRISHAKJAGAT

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KrishakJagat- Weekly Agriculture Newspaper

  • 30-05-2013
    उन्नत कृषि तकनीक से बढ़ेगा उत्पादन : श्री उपाध्याय (विशेष प्रतिनिधि) भोपाल। प्रदेश में 20 फीसदी उत्पादन बढ़ाने के लिये कृषि तकनीक को बढ़ावा देना आवश्यक है। इसके लिये सोयाबीन में रिज एंड फरो,...
  • 30-05-2013
    गेहूं की समर्थन मूल्य पर खरीद 243 लाख टन हुई नई दिल्ली। चालू रबी विपणन सीजन 2013-14 में गेहूं की समर्थन मूल्य पर खरीद 243 लाख टन की हो पाई है। प्रमुख उत्पादक राज्यों में गेहूं की दैनिक आवक कम हो गई है।...
  • 29-11-2013
    भोपाल।  राज्य शासन ने 9 आईएएस अधिकारियों की पदोन्नति के बाद नई पदस्थापना की है। शासन ने सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा पदेन अपर विकास आयुक्त डॉ. राजेश राजौरा को पदोन्नत कर प्रमुख सचिव...
  • 30-05-2013
    विधानसभा उपाध्यक्ष श्री हरवंश सिंह का निधन भोपाल। म.प्र. विधानसभा उपाध्यक्ष एवं वरिष्ठ कांग्रेसी नेता श्री हरवंश सिंह का गत दिनों दिल का दौरा पडऩे से निधन हो गया वे 63 वर्ष के थे। श्री हरवंश...
  • 30-05-2013
    विकास योजनाओं का तेजी से करें क्रियान्वयन भोपाल। अपर मुख्य सचिव श्रीमती अरूणा शर्मा ने गत दिनों नर्मदापुरम् संभाग में पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा सामाजिक न्याय विभाग की योजनाओं के अमल की...
  • 29-11-2013
    खंडवा। किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग म.प्र. शासन की पी.पी. पार्टनर संस्था के.जे. एजुकेशन सोसायटी भोपाल ने खंडवा जिले के छैगांवमाखन, खालवा, पंधाना विकासखंड के चयनित ग्रामों में फार्म स्कूल...
  • 22-05-2013
    उद्योग क्षेत्र की भांति कृषि में होने वाली दुर्घटनाओं का राष्ट्रीय स्तर पर कोई पर्याप्त व विश्वसनीय जानकारी का स्त्रोत नहीं है। अत: इन दुर्घटनाओं की संख्या एवं इनसे होने वाली क्षति का...
  • 22-05-2013
    कृषि में मशीनों के उपयोग से जहां पैदावार में बढोत्तरी हुई है। वहीं मशीन संबंधित दुर्घटनाओं की संख्याओं में भी बढ़ोत्तरी हुई है इन दुर्घटनाओं से होने वाले जान माल का नुकसान ना सिर्फ पीडि़त...
  • 22-05-2013
    खेत की जुताई दो-तीन बार करके मिट्टी को भुरभुरा बना चाहिए । अच्छी प्रकार से तैयार खेत में 1.5-2 मीटर की दूरी पर 30 से.मी. चौड़ी नालियां बना लेते हैं। नालियों के दोनों किनारों पर 60 से.मी. की दूरी पर थाला...
  • 22-05-2013
    जापानी लाँग ग्रीन - यह एक अगेती किस्म है जो 45 दिनों में तैयार हो जाती है। इसके फल 30-40 से.मी. लम्बे हरे होते हैं। गूदा हल्का तथा कुरकुरा होता है।  चाइना - यह किस्म साधारण उपज देने वाली मध्यम,...
  • 29-11-2013
    भोपाल।  राज्य शासन ने 9 आईएएस अधिकारियों की पदोन्नति के बाद नई पदस्थापना की है। शासन ने सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा पदेन अपर विकास आयुक्त डॉ. राजेश राजौरा को पदोन्नत कर प्रमुख सचिव...
  • 29-11-2013
    किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें (मनीष पाराशर/ नानक फूलमाली) इंदौर। सोयाबीन फसल पकने के ऐन वक्त पर आसमान से अचानक बरसी आफत ने जहां पीले सोने की फसल पर वज्रपात किया, वहीं इससे किसानों की...
  • 28-11-2013
    भोपाल।नई दिल्ली। इस खरीफ में कहीं बाढ़ कहीं बेमौसम बारिश, कहीं सूखे के कारण किसान ने कहीं दुबारा बुवाई की, कहीं खड़ी फसल पर बखर कर दिया पर केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री शरद पवार तो खाद्यान्न...
  • 27-11-2013
    रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय भारत सरकार के संयुक्त सचिव डॉ. ए.जे.व्ही. प्रसाद से आईसीसीसीएसआर एक्सीलेंस अवार्ड ग्रहण करते हुए आर.सी.एफ. के निदेशक (मार्केटिंग) श्री अशोक घसघसे । इस अवसर श्री आर.बी....
  • 30-05-2013
    उन्नत कृषि तकनीक से बढ़ेगा उत्पादन : श्री उपाध्याय (विशेष प्रतिनिधि) भोपाल। प्रदेश में 20 फीसदी उत्पादन बढ़ाने के लिये कृषि तकनीक को बढ़ावा देना आवश्यक है। इसके लिये सोयाबीन में रिज एंड फरो,...

समस्या-    क्या जायद में तिल लगाई जा सकती है। यदि हां तो कृपया तकनीकी बतायें। सुखलाल चौधरी, सतवास

समाधान-

 ग्रीष्मकालीन तिल की फसल वर्षाकालीन तिल से अधिक उत्पादन देने में सक्षम है। आपने प्रश्न किया है खेती में थोड़ा बहुत तो जोखिम उठाना ही पड़ता है। बुआई का समय 15 फरवरी से 10 मार्च तक ही है। ऐसा अनुसंधान कहता है। परन्तु इस वर्ष भूमि में नमी बार-बार मावठ के चलते अच्छी है तिल 80 दिनों में कट जाती है। अप्रैल-मई के 60 दिन लगा लें तो 20 दिन जून में लगेंगे जो सामान्य मानसून की परिधि में आते हैं। मूंग, उड़द के अलावा कुछ क्षेत्र में तिल भी लगाई जा सकती है। हम सबका अनुभव है वर्तमान में मानसून आने में जून तो खत्म हो ही जाता है। आप निम्न उपाय करें। जल्द से जल्द बोनी करें। टीकेजी 21 जाति जो जल्दी पकती है यथासम्भव वही लगायें। 5 किलो बीज प्रति हेक्टेयर की दर से डालें। कतार से कतार 30 से.मी. तथा पौध से पौध 8-10 से.मी.। यूरिया 130 किलो, 250 किलो सिंगल सुपरफास्फेट तथा 33 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश प्रति हेक्टेयर की दर से डालें। कीटों, रोगों की सतत निगरानी करके उपयुक्त उपाय करते रहें तथा खरपतवारों से भी फसल को मुक्त रखें

समस्या- खेतों में खड़ी फसल, खलिहान में रखी फसल तथा भंडारगृह में अनाज को चूहों से बहुत हानि होती है, बचाव के उपाय बतलायें। - लक्ष्मण सिंह, राजगढ़

समाधान-

  चूहों का आतंक खेत, खलिहान से लेकर भंडारण और घरों में रखे अनाज को बर्बाद करने में सर्वविदित हैं। उत्पादन का दसवां भाग तक का नुकसान आंका जा चुका है। वास्तविकता यह है कि चूहे खाते कम हैं परन्तु नुकसान अधिक करते हंै। इसकी समस्या इतनी विकराल है कि केवल चहुंमुखी प्रयासों से ही इन पर नियंत्रण सम्भव है। द्य घरों तथा गोदामों में बिल्ली पालन एक अच्छा उपाय है। इसके डर के चूहे परिवार सहित नदारद हो जाते हैं। द्य खेतों में फसलों के बीच चूहों के बिलों की पहचान कर जगह-जगह मोटे छींदे के गत्ते गाड़कर उल्लुओं के बैठने के लिए जगह बनायें ताकि रात्रि पर उल्लू चूहों का सफाया कर सकें। द्य जहर प्रपंच करना भी जरूरी है। आटा, बेसन, तेल, गुड़ के मिश्रण से तैयार गोलियां पहले दो दिन बिना जहर के रखना चाहिए ताकि प्रलोभन होकर अधिक संख्या में चूहे इकट्ठे हो सके। तीसरे दिन 1 भाग जिंक फास्फाईड 33 भाग उपरोक्त मिश्रण में मिलाकर गोली तैयार करें और रखें ताकि अधिक से अधिक शिकार हो सके। द्य विषयुक्त दवा खाकर प्यास लगती है ऐसी व्यवस्था हो कि सरलता से पानी उपलब्ध नहीं हो सके। द्य मरे चूहों को मिट्टी में गाड़कर दफना दें ताकि कोई पशु, पक्षी, बिल्ली उसे नहीं खा पायें।

समस्या- जायद में भिण्डी, टमाटर लगाया है। कीट समस्या निदान के उपाय बतायें। - जगमोहन माली, इछावर

समाधान-

भिण्डी जायद की प्रमुख सब्जी, नकदी फसल है जिसका विस्तार भी होना चाहिए। खरीफ फसल की तुलना में कीट, रोग कम आते हैं फिर भी कुछ कीट, रोग की सक्रियता से हानि होती है जिसे निम्न बिन्दुओं को अपनाकर रोका जा सकता है। द्य माहो तथा जेसिड सबसे अधिक सक्रिय रहते हैं। क्षति सीमा के पहले ही मैलाथियान 50 ई.सी. 2 मि.ली. प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर दो छिड़काव 15 दिनों से अंतर से करें। द्य फुदका, तना छेदक की रोकथाम हेतु डायमिथिएट 30 ई.सी. या मेटासिस्टाक्स 20 ई.सी. 1 से 1.5 मि.ली. प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। द्य टमाटर में झुलसा रोग पत्तियों पर आता है। रोकथाम हेतु डाईथेन एम 45 की 2 ग्राम दवा प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। द्य भिण्डी में भभूतिया रोग बहुतायत से आता है तथा हानि पहुंचाता है। उपचार हेतु 2 ग्राम सल्फेक्स प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर 15 दिनों के अंतर से दो छिड़काव करें। द्य भिण्डी की फसल पर सफेद मक्खी की सक्रियता पर पैनीनजर रखना जरूरी है क्योंकि इसके द्वारा पीला मोजेक बीमारी का विस्तार होता है। बचाव हेतु मेटासिस्टाक्स 2 मि.ली. प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव 15 दिनों के अंतर से किये जाये।

समस्या- हमारे क्षेत्र में सफेद लट का प्रकोप अधिक बढऩे लगा है उपाय सुझायें। - रामभरोसे सिंह, नीमच

समाधान-

सफेद लट की समस्या हमारे पड़ोसी प्रदेशों में हमारे यहां आई और बढ़ रही है। इसके नियंत्रण के लिए प्रयास ग्रीष्मकाल से ही किया जाना अच्छा परिणाम दे सकता है। आप निम्न उपाय करें- द्य पहली बरसात होते ही खेतों में छिपे सफेद लट, भृंग आर-पार लगे पेड़ों पर आश्रय ले लेते हैं। यदि उन्हीं वृक्षों पर कार्बोरिल 0.2 प्रतिशत घोल का छिड़काव कर दिया जाये तो भविष्य की चिंता समाप्त हो जायेगी। द्य अन्य फसलों की बुआई के पहले बीज का उपचार क्लोरोपायरीफास 20 ई.सी. अथवा क्विनालफास 25 ई.सी. 25 ग्राम प्रति किलो बीज का उपचार किया जाये फिर बुआई की जाये तो फसल सुरक्षित रहेगी। द्य खड़ी फसल में पानी के प्रवाह के साथ 4 लीटर क्विनालफास 25 ई.सी. अथवा क्लोरोपायरीफास 20 ईसी प्रति हेक्टर की दर से खेत में बहायें। द्य ग्रीष्मकालीन गहरी जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करके इसकी सुंडी बाहर निकालें ताकि पक्षी उन्हें खा सके।

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