सफेद मूसली से लखपति हुए कैलाश

शाजापुर जिले के ग्राम पनवाड़ी के निवासी कैलाशचन्द्र पिता रामनारायण सफेद मूसली की खेती कर लखपति बन गए हैं। कैलाशचन्द्र बताते हैं कि उनके पास स्वयं की 3.12 हेक्टर भूमि है, जिस पर खरीफ सीजन में सोयाबीन, सफेद मूसली एवं रबी सीजन में आलू, प्याज एवं लहसुन की खेती करते हैं।
कैलाशचन्द्र ने बताया कि खरीफ में उनके द्वारा लगातार 3 वर्षो से सफेद मूसली की खेती की जा रही है। शुरू में उन्होंने एक बीघा जमीन पर सफेद मूसली की खेती की शुरूआत की। लगातार अच्छा उत्पादन एवं लाभ मिलने से वे विगत 3 वर्षो से एक से डेढ़ हेक्टर भूमि में सफेद मूसली की खेती कर रहे है। गत वर्ष 2016-17 में उन्होने डेढ़ हेक्टर क्षेत्र में डेढ़ क्विंटल सफेद मूसली की फसल लगाई थी, जिससे 6 क्विंटल सफेद मूसली प्राप्त हुई। सफेद मूसली को सुखाकर एवं छिलकर इन्दौर के बाजार में 12 सौ रूपये प्रति किलो की दर से विक्रय किया, जिससे 7.20 लाख रूपये की आय प्राप्त हुई है। इसी तरह वर्ष 2017-18 में उनके द्वारा औषधीय फसल अंतर्गत सफेद मूसली की फसल लगाई गई है गत वर्ष छिलाई की समस्या थी, श्रमिकों द्वारा हाथ से चाकू के द्वारा एक-एक फींगर की छिलाई करवाना पड़ती थी। जिसके कारण प्रति किलो मूसली खुदाई एवं छिलाई पर 200 रूपये व्यय होता था। अभी नई तकनीक (सोलोराईजेशन) के माध्यम से छिलाई करने में 100 रूपये प्रति किलो सूखी मूसली पर व्यय हो रहा है। इस प्रकार छिलाई खर्चा आधा हो जाने से सकल लाभ बढऩे से उत्साहित होकर उन्होने सफेद मूसली का रकबा बढ़ाकर 2 हेक्टर कर दिया है।
कैलाशचन्द्र ने बताया कि उनके द्वारा औषधीय खेती करने से गांव के अन्य 4-5 कृषक भी प्रभावित हुए है। उन्होने प्रेरित होकर औषधीय की खेती (सफेद मूसली) करना प्रांरभ किया है। इन कृषकों को उनके द्वारा बीज प्रदाय किया जाकर इस खेती के लिये प्रोत्साहित किया गया। अब उनके द्वारा भी सफेद मूसली की औषधीय खेती की जा रही है। कैलाशचन्द्र ने बताया कि पनवाड़ी में उद्यान विभाग की शासकीय नर्सरी स्थापित है। नर्सरी प्रभारी ग्रामीण उद्यान विकास अधिकारी सुमित पाटीदार द्वारा हम लोगों को समय-समय पर तकनीकी मार्गदर्शन एवं सलाह दी जाती है।
जिससे प्रेरित होकर गांव के किसानों का औषधीय खेती की ओर रूझान बढ़ा है।

Share On :

Follow us on

Subscribe Here

For More Articles

Releated Articles