‘गेंदा’ बदल रही है जिंदगी

सतपुड़ा की हसीन वादियों के लिए मशहूर जिले के कुकरू के नजदीकी ग्राम खामला के निवासी युवा कृषक संतोष कोगे अपनी पारिवारिक दो एकड़ जमीन में परंपरागत खेती कर सामान्य जीवन यापन कर रहे थे। उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की सलाह पर उन्होंने गेंदे की खेती में किस्मत आजमाई। और मात्र ढाई सौ रूपए के बीज से फूलों की खेती कर दस हजार रूपए से अधिक की आय प्राप्त की। यह संतोष के लिए खेती में नवाचार था, परन्तु अब वे इसके लिए उत्साहित हैं व इस साल आधा एकड़ जमीन में फूलों की खेती करने की तैयारी कर रहे हैं।
पिछले साल खरीफ की बोनी का समय आने पर बीज खरीदने हेतु संतोष भैंसदेही की बीज दुकान पर पहुंचे। दुकानदार को अन्य किसानों में व्यस्त देखकर संतोष समय बिताने के लिए दुकान पर रखे विभिन्न तरह के सब्जी, फूलों के बीज देखने लगे। देखते-देखते उनकी नजर गेंदे के फूल के बीज के पैकेट पर पड़ी। उद्यानिकी विभाग द्वारा आयोजित एक कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम में संतोष को गेंदे की खेती से मिलने वाले लाभों की जानकारी मिली थी। इसी बात को ध्यान में रखते हुए सोयाबीन के बीज के साथ-साथ संतोष ढाई सौ रूपए के गेंदे के बीज के पैकेट भी खरीद लाए। जमीन कम होने के कारण माता-पिता ने खेत में गेंदा लगाने की सहमति नहीं दी, तो संतोष ने अपनी घर के पीछे की बाड़ी में उक्त बीज बिखेर दिए। बीज से तैयार पौधों पर जब बड़े-बड़े गेंदे के फूल खिले, तो संतोष के परिवार को अच्छा लगा। दीवाली के समय अच्छी कीमत होने के कारण संतोष ने आसपास के गांवों एवं भैंसदेही में उक्त फूल बेचकर दस हजार रूपए से अधिक की कमाई की। संतोष बताते हैं कि बाड़ी में गेंदा लगाने के कारण जो टमाटर की फसल उनके द्वारा हर साल लगाई जाती थी, उसमें इस साल कीड़े कम लगे तथा उत्पादन भी अच्छा हुआ। गेंदे की फसल में ज्यादा देखभाल की जरूरत भी नहीं पड़ी।
उद्यानिकी विभाग की उपसंचालक डॉ. आशा उपवंशी बताती हैं कि गेंदे की खेती को बहुत ज्यादा देखभाल एवं लागत की आवश्यकता नहीं होती है। मुख्य फसल के रूप में लगाकर यदि दशहरे, दीवाली एवं शादियों के समय इसकी फसल ली जाए तो अच्छा लाभ कमाया जा सकता है।
गैंदे के पौधों को ट्रैप फसल के रूप में अन्य सब्जियों/फसलों के बीच में (12-15 लाइन अन्य फसल के बाद 1 लाइन गेंदे की) लगाकर भी कई तरह के कीड़े-बीमारियों से मुख्य फसल का बचाव किया जा सकता है, मिट्टी में पाए जाने वाले निमेटोड की समस्या से भी छुटकारा मिलता है। ट्रैप फसल के रूप में लगाने पर फूलों को बेचकर अतिरिक्त आय भी कमाई जा सकती है।

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