खेती में कृषि यंत्रों का महत्व

किसी भी फसल के उत्पादन में प्रथम कार्य खेत की तैयारी होता है, इसमें भूमि को तैयार कर बीज की बुवाई के लिये शैय्या तैयार करते हैं। खेत की तैयारी हेतु पर्याप्त यन्त्र उपलब्ध हैं। भारतीय कृषि में ट्रैक्टर चालित जुताई यन्त्र के द्वारा मशीनी सुविधाओं का विस्तार हुआ है। भारत आज ट्रैक्टर उद्योग में विश्व की तुलना में सर्वोपरि स्थान पर है। सामान्यत: जुताई औजार जैसे- हल, डिस्क हैरो या कल्टीवेटर प्रचलित यंत्र है। जुताई उपकरण के प्रयोग द्वारा पौधशाला में मृदा संरचना उचित रुप से तैयार हो जाती है। फसलों में आधुनिक भूमि समतलीकरण यंत्रों द्वारा भूमि समतल करके नर्सरी तैयार कर लेते हैं जिससे विभिन्न जल भराव की समस्यायें कम हो जाती हैं। वे क्रियायें हैं जो खेत में बीजों की बुवाई करने के पूर्व की जाती हैं जैसे खेत की जुताई करना, भूमि का समतल करना, खाद या उर्वरक को भूमि में मिलाना, पाटा लगाना आदि। मुख्य रूप से डिस्क हल, मोल्डबोर्ड हल, कल्टीवेटर, हैरो आदि यन्त्र हैं। इनसे मृदा की खुदाई 15-90 सेंमी. तक करते हैं। इसी प्रकार सब-सोयलर, चिजल प्लाऊ, रोटावेटर, रिजर, लेवलर तथा बैड फॉर्मर आदि विशेष उद्देश्यों के लिए प्रयोग किये जाते हैं। परिशुद्ध खेती को महत्वपूर्ण आवश्यकता के लिए एवं उचित भूमि समतलीकरण के लिए ट्रैक्टर चालित लेजर लैण्ड लेवलर उपयुक्त है। विभिन्न ट्रैक्टर चालित यंत्र उपलब्ध है। इनका संक्षिप्त वर्णन इस प्रकार है-

मोल्ड बोर्ड हल
यह हल खेत की प्राथमिक जुताई के लिए उपयुक्त है। यह मिट्टी को काटकर पलट देता है जिसके कई लाभ हैं, जैसे खरपतवार को नष्ट करना, हरी खाद की फसल को मिट्टी में दबाना आदि। ट्रैक्टर चालित हल से 25-30 सेमी. गहरी जुताई होती है। इसके मुख्य भाग फार, मोल्ड बोर्ड, भूमि पाश्र्व एवं फ्रोग हैं।

तवेदार हल
इस यन्त्र का प्रयोग प्राथमिक जुताई के लिए उन स्थानों में उपयुक्त है जहाँ मिट्टी में कंकर-पत्थर तथा अधिक खरपतवार हैं या मिट्टी चिकनी व चिपकदार होती है। तवे मिट्टी काटकर एक ओर गिराते रहते हैं। इसका सामान्य व्यास 60-70 सेमी. होता है और कटी हुई मिट्टी की फांक 30-50 सेमी. होती है। इससे जुताई के बाद ढेले तोडऩे नहीं पड़ते हैं, वे अपने आप टूट जाते हैं। प्रत्येक डिस्क एक अलग-अलग धुरी पर बेयरिंग की सहायता से घुमती है। इससे जोतने की गहराई को ट्रैक्टर की हाइड्रोलिक प्रणाली की मदद से बढ़ा या घटा सकते हैं। अगर हल में पहिया लगा है तो उसको भी ऊँचा-नीचा करने पर गहराई में परिवर्तन किया जा सकता है। जमीन कड़ी होने पर गहराई अधिक करने के लिए अतिरिक्त भार रखना पड़ सकता है। डिस्क और टिल्ट कोण को घटा एवं बढ़ाकर जुताई की चौड़ाई एवं गहराई बढ़ा सकते हैं लेकिन यह डिस्क कोण 42-45 डिग्री और टिल्ट 15-25 डिग्री कोण से अधिक नहीं रखना चाहिए। अधिक कोण पर खींचने की शक्ति बढ़ती है और साथ ही कंूड की मिट्टी भी दूर फेंकी जाती है।
सब-सोयलर
आज कल भारी भरकम मशीनों का अधिक प्रयोग होने के कारण से खेत में लगभग 25 सेमी. से ज्यादा गहराई पर कड़ी परत बनती जा रही है। इस समस्या के समाधन के लिए सब-सोयलर है। सब-सोयलर लोहे का मजबूत 2.5 सेमी. मोटा व 18 सेमी. चौड़ा होता है जो फ्रेम मे लगा होता है और इसके अगले सिरे पर शिन लगा होता है। शिन के निचले सिरे पर फाल लगा होता है जो सबसे पहले मिट्टी के अन्दर जाता है। सब-सोयलर को खींचने के लिए लगभग 45-50 अश्व शक्ति के ट्रैक्टर की जरुरत पड़ती है। यह यंत्र 70-80 सेमी. की गहराई तक जुताई कर सकती है। इस मशीन के प्रयोग से ज्यादा गहराई तक की सख्त मिट्टी को तोड़ा जा सकता है। किसान 3-5 साल में एक बार सब-सोयलर द्वारा गहरी जुताई अवश्य करें।


कल्टीवेटर
इस यन्त्र का प्रयोग खेत की जुताई करने तथा खेत में खाद मिलाने के लिए किया जाता है। कुछ फसलों में निराई-गुड़ाई करने का काम भी कर सकते हैं। इसमें 7, 9, 11 या 13 टाईन लगी होती है जो स्पिं्रग-भारित होती हैं। हल्की भूमि में प्रथम जुताई तथा भारी भूिम में इसका उपयोग मोल्ड बोर्ड तथा हैरो से जुताई करने के बाद करना चाहिए। इससे ईंधन की बचत होती है। इससे प्रति घण्टा 0.4-0.6 हेक्टेयर जमीन जोत सकते हैं।

 

 

डिस्क हैरो
यह ट्रैक्टर चालित द्वितीय भू-परिष्करण बहुदेशीय यन्त्र है। यह यन्त्र मिट्टी एवं खरपतवारों को काटकर ऊपर उठाता है, और पलट देता है। डिस्क हैरो उच्च कार्बन इस्पात से बनी होती है और इनकी धार 5-7 सेमी. तक होती है। इनके किनारे तेज होते हैं जो कि मिट्टी को काटते हैं। डिस्क साफ्ट एक लाइन से लगे होते हैं और डिस्क के बीच में स्पूल लगा होता है जो डिस्क से डिस्क की दूरी बनाये रखता है। तवेदार समूह चलने की दिशा से एक कोण पर सेट किये जाते हैं। यदि यह कोण बढ़ाया जाये तो मिट्टी को काटने की चौड़ाई बढ़ जाती है। यह यन्त्र इस बात पर निर्भर करता है कि तवेदार समूह आपस में किस प्रकार जुड़े हुए हैं।

 

रोटावेटर
इस यन्त्र का उपयोग हरी खाद बनाने में भी होता है। यह खेत की मिट्टी को भुरभुरी बनाने में भी उपयोगी है। इसका उपयोग गीली एवं सूखी दोनों तरह की भूमि को जोतने में किया जाता है, खासकर यह हल्की एवं मध्यम अवस्था वाली मिट्टी में चलने में पूर्ण सक्षम है। यह 10-15 सेमी. गहराई तक की मिट्टी को मुलायम करने के लिए प्रयोग किया जाता है। इससे एक बार की जुताई से ही खेत बुवाई के लिए तैयार किया जा सकता है। इस यन्त्र को चलाने के बाद सीधे बुवाई कर सकते हैं। रोटावेटर को लगभग 40-50 अश्वशक्ति वाले ट्रैक्टर की पी.टी.ओ. द्वारा शक्ति दी जाती है। रोटावेटर की फालें अंग्रेजी के अक्षर ‘एलÓ आकार की होती हैं। ये एक के बाद एक विपरीत दिशा में रोटर शॉफ्ट पर लगी होती हैं, जो कि ट्रैक्टर के पी.टी.ओ. शॉफ्ट द्वारा लगभग 210 आर.पी.एम. पर चलायी जाती है। यह मशीन एक बार में ही मिट्टी को भुरभुरी तथा बुवाई योग्य बना देती है। इस यंत्र के पीछे मिट्टी को समतल करने के लिए एक लेवलर भी लगा रहता है जिससे मिट्टी भुरभुरी एवं समतल हो जाती हैं इसकी कार्य क्षमता 0.40 हेक्टेयर प्रति घण्टा है। अत: एक दिन में लगभग 1.5 से 2 हे. खेत की एक बार में जुताई की जा सकती है। (क्रमश:)

  • अनुराग पटेल
  • दुष्यन्त सिंह 
    mail : 3679anuragpatel@gmail.com
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