रिलायंस फाउण्डेशन की किसानों को सलाह

  •  चना  फसल में इल्ली की संख्या दो या दो से अधिक प्रति मीटर कतार में पाए जाने पर इसका नियंत्रण नीम कीटनाशक/तेल की 50 मिली मात्रा प्रति 15 लीटर पानी में मिलाकर छिड़कें।
  • मटर, चना एवं मसूर की फसल में उन्नत खरपतवार प्रबंधन के लिए पेण्डीमिथालीन नामक नींदानाशक 700 मिली/एकड़ की दर से बुवाई के 3 दिन के भीतर प्रयोग करें अर्थात् बुवाई के बाद 3 दिन तक परंतु उगने से पहले।
  • गेहूं फसल में दीमक का प्रकोप दिखाई दे तो बचाव हेतु क्लोरोपायरीफॉस 20 ईसी 1ली. प्रति एकड़ सिंचाई के साथ दें।
  • शरदकालीन गन्ने की किस्म जैसे को.जे.एन. 86572, को.जे.एन. 86141 इत्यादि का चयन कर दो से तीन आंख वाले टुकड़ों को एमिसान या बाविस्टीन 2 ग्राम प्रति लीटर पानी के घोल में 10 से 15 मिनट डुबोकर उपचारित करें।
  • सरसों की उन्नत किस्म जैसे- आरएच-749, एनडीआर-8501, पूसा महक, पूसा जय किसान, पूसा तारक, जेएम-03, भरत- 01, अरावली एवं वरूणा इत्यादि में से किसी एक का चयन करें।

उद्यानिकी

  • बगीचों की साफ-सफाई करें व नींबू अमरूद में फल बनना शुरू हो गया है, फलदार उद्यान में सिंचाई की टपक पद्धति का उपयोग कर जल की उपयोगिता बढ़ा सकते हैं।
  • भिन्डी, मिर्च, टमाटर, बैंगन में इस समय रसचूसक कीट की सम्भावना हो सकती है। अत: दिखाई देने पर इसके नियंत्रण हेतु डाइमिथिएट 750 मिली दवा प्रति हेक्टेयर 500 से 600 लीटर पानी में घोल बनाकर 10-10 दिन के अन्तराल पर छिड़काव करें।

पशुपालन 

  • मुर्गीपालन हेतु पोल्ट्री शेड में रात के समय 200 वाट के बल्ब का प्रयोग करें। और रात में मुर्गियों को ठंड से बचाएं।
  •  बकरियों में पीपीआर का टीकाकरण अवश्य लगवाएं।

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संपर्क करें सुबह 9.30 से शाम 7.30 बजे तक

 

 

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