प्रो-बायोटिक्स का कुक्कुट पालन में महत्व

वर्तमान में कुक्कुट पालन में गहन उत्पादन दवाब जैसे परिवहन, अतिनिकटता, अव्यस्थित वायुदाब, भोज्य विषाकतता के कारण आंत्र जैविकों की कार्य क्षमता पर प्रभाव पड़ता है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। इस दशा में आंत्र के हानिकारक जैविकों को कम करने के लिए प्रतिजैविक भोज्य उत्प्रेरक जैसे प्रतिजैविक, अप्राकृतिक प्र्रतिजैविक तत्वों का उपयोग किया जाता है। फलस्वरूप प्रतिजैविकों के द्वारा वृद्धिदर तथा भोज्य पदार्थों की उपयोगिता भी बढ़ जाती है। फलत: प्रतिजैविकों का अंश मांस एवं अण्डों में आ जाता है। परिणामस्वरूप इस प्रकार का उत्पाद मनुष्य के स्वास्थ्य के लिये हानिकारक होता है। अत: कई देशों में प्रतिजैविकों का प्रयोग कुक्कुट आहार में प्रतिबंधित किया गया है। अत: वर्तमान में प्रतिजैविकों के स्थान पर नई तकनीक के तहत प्रोबायोटिक्स अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रहा है।

प्रो-बायोटिक्स क्या है ?

शाब्दिक अर्थों में प्रोबायोटिक्स का मतलब ‘जीवन के लिये’ प्रतिजैविक के विपरीत। साधारणत: प्रोबोयोटिक्स जीवित सूक्ष्म जैविक या उनका स्राव जो कि प्रतिजैविक या उत्प्रेरक के समान है। प्रोबायोटिक्स का नामकरण पार्कर नामक शास्त्र ने 1974 में किया। उनके अनुसार प्रोबायोटिक्स सूक्ष्म जैविक या पदार्थ होता है जो कि आंत्र के लाभदायक सूक्ष्म जैविकों की क्षमता को बढ़ा देता है।

प्रो-बायोटिक्स का चयन

प्रोबायोटिक्स की इस प्रक्रिया का चयन महत्वपूर्ण चरण है जो आंत्र के वातारवरण में रहकर एवं अन्य लाभदायक सूक्ष्म जैविकों की क्षमता को बढ़ा सकें। इस प्रकार प्रोबायोटिक्स का चयन करते समय निम्र बातों का ध्यान रखना अति अवश्यक है।

  • प्रोबायोटिक्स हानिकारक नहीं हों।
  • यह पशु और मनुष्यों के लिये अविषाक्त होना चाहिए।
  • यह आमाशय के अम्लीय प्रभाव को सहन करते हुए आंत्र तक पंहुच सके।
  • यह शरीर के बाहर या अप्राकृतिक वातारण में बढऩे की क्षमता रखता हो।
  • खाद्य प्रसंस्करण और मिश्रण के समय जीवित रहने की क्षमता अधिक होनी चाहिए।

इसमें किण्वनकरण के फलस्वरूप लैक्टिक अम्ल का उत्पादन होना चाहिए जिससे कालिफाम जीवाणु की वद्धि को रोका जा सके। 
यह पशुओं के आंत्र में सामान्य रूप से रह सके।

कुक्कुट पालन दूसरे कृषि व्यवसायों की तुलना में एक अत्याधुनिक और अधिक उत्पादन क्षमता के रूप में उभर रहा है। पिछले 35 वर्षो में कुक्कट व्यवसाय की संख्या में ही नहीं वरन इसकी उत्पादन क्षमता और उत्पाद के गुणों में भी पर्याप्त सुधार आया है। कुक्कट पालन के कुल व्यय में से भोज्य पदार्थों का 70 से 75 प्रतिशत का योगदान रेहता है। लाभदायक कुक्कट पालन के लिये संतुलित एवं कम आहार तथा कम समय में अधिक वृद्धि होनी चाहिए तभी कुक्कट पालन एक फायदेमंद व्यवसाय हो सकता है। अत: यह आवश्यक हो जाता है कि कुशल आहार प्रबंधन से उपलब्ध भोज्य पदार्थों में से पोषक तत्वों की गुणवत्ता को बढ़ाया जाये। इस प्रकार इस लक्ष्य को पाने के लिए भोज्य पदार्थों में उत्प्रेरक, आक्सीकारक, प्रतिजैविक एवं प्रोबायोटिक्स का समिश्रण किया जाता है।

प्रो-बायोटिक्स की बाजार में उपलब्धता

ज्यादातर बाजार में उपलब्ध प्रोबायोटिक्स जैसे लैक्टोबेसीलस, लै. ओसीडोफिलस, लै बायफीडस, लै लैक्टीसद्ध, स्टेप्टोकोकस थर्मोफिलस, स्ट. फेसियम, बायोफिडो बैक्टीरियम एवं कवक है। उपरोक्त में से लै. बेसीलस का उपयोग ज्यादातर किया जाता है।

प्रो-बायोटिक्स की पाचन में भूमिका

प्रोबायोटिक्स का मुख्य लक्षण है कि वे पशुओं के आंत्र में पोषक तत्वों के पाचन और विटामिन के निर्माण को बढ़ा देता है। यह भी पाया कि लैक्टोबेसीलस प्रोबायोटिक्स को ज्वार/ सोयाबीन या ज्वार/ बाजरा/ सोयाबीन आहार में मिला कर देने से वसा, नाईट्रोजन, कैल्शियम, फास्फोरस , मैगनीज और कापर का संतुलन बढ़ जाता है।

पाचक उत्प्रेरकों की कार्यशीलता में वृद्धि

गट के सूक्ष्मजीवों के उत्प्रेरक पोषण में सहायक होते हैं क्योंकि निम्र आंत्र में पोषक तत्वों की पोषकता को बढ़ा देते है। लैक्टोबेसीलस जाति में उत्पे्ररक बाहय कोशिकीय रूप में भी उत्पन्न होता है और उत्प्रेरक आंत्र के पाचक उत्प्रेरकों की सांर्दता बढ़ा देता है। विभिन्न प्रकार के लैक्टोबैसीलस बाह्य और आंतरिक केशिकीय रूप से कई प्रकार के उत्प्रेरकों जैसे का स्राव करता है।

रोग प्रतिरोधक तंत्र का उदीपन

प्रोबायोटिक्स के द्वारा विभिन्न प्रकार के गट संक्रमण के प्रति रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया जा सकता है और यह आवश्यक पशुओं के आंत्र को भी प्रोबायोटिक्स के द्वारा कम किया जा सकता है या गट के विभिन्न प्रकार के एन्टीजन के कारण जो प्रतिरोधक क्षमता उत्पन्न हेाती है वो अवश्यक पशुओं के आंत्र संक्रमण से बचाव के लिये महत्वपूर्ण होता है। जीवाणु मुक्त पशुओं में लै. एसीडोफीलस को मुख्य विधि से देने से कुल सीरम प्रोटीन जैसे ग्लोबूलीन का स्तर एलबूमीन के बजाय बढ़ जाता है। जीवित जीवाणु कल्चर से उत्पन्न प्रोबायोटिक्स से भोजन उपयोगिता और कुक्कुट के उत्पादन क्षमता पर सार्थक प्रभाव पड़ता है। ये आहारनाल में लाभदायक जीवाणुओं की स्थापना और हानिकारक जीवाणु का बहिर्गमन कर देता है। यह पाचन तंत्र को संतुलित रखता है एवं आहार की पाचन शीलता और प्रतिरोधकता के स्तर को बढ़ाता है । इस प्रकार यह कुक्कुट की सम्पूर्ण उत्पादन क्षमता को बढ़ाने में सहायक सिद्ध होता है।

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