दूध उत्पादन में संतुलित आहार का महत्व

संतुलित पशु आहार – ऐेसा आहार जिसमें सभी आवश्यक पोषक तत्व एक उचित अनुपात उचित मात्रा में मिलाये जाते हैं।

संतुलित पशु आहार बनाने के लिये उच्च गुणवत्ता के अनाज ग्वारमील, अनाज भूसी, शीरा, नमक, खनिज लवण तथा विटामिनों का प्रयोग किया जाता है। इसे पशु बड़े चाव से खाते हैं और यह महंगा भी नहीं होता है।

  • ऊर्जा प्रोटीन, खनिज व विटामिन से भरपूर पशु आहार से जानवर स्वस्थ रहते हैं, उनका विकास भी अच्छा होता है और जानवर समय पर हीट पर आ जाते हैं।
    प्रोटीन स्त्रोत : जैसे सरसों खली, मूंगफली खली, कपास खली, सूर्यमुखी खली, ग्वारमील आदि।
    ऊर्जा स्त्रोत
  • गेहूं, मक्का, बाजरा, ज्वार आदि।
  • गर्भ में पल रहे बच्चे के सम्पूर्ण विकास के लिये संतुलित पशु आहार देना लाभप्रद होता है।
  • पशुओं के प्रजनन शक्ति, दुग्ध उत्पादन और फैट उत्पादन में भी वृद्धि करता है।
  • बछड़े/बछियों को 1 से 1.5 किलो, प्रतिदिन संतुलित पशु आहार उनकी वृद्धि और स्वास्थ्य हेतु दें।
  • ब्याने वाला गाय/भैंसों को 1 किलो पशु आहार और 1 किलो अच्छी गुणवत्ता की खली गर्भावस्था के अंतिम 2 महिने में अतिरिक्त देना चाहिए।
  • दुधारू पशुओं को स्वस्थ रखने हेतु 2 किलो संतुलित पशु आहार और प्रति लीटर उत्पादित दूध के लिये गाय को 400 ग्राम तथा भैंस को 500 ग्राम संतुलित पशु आहार दें।
  • ऐसी गाय जो 6 लीटर दूध प्रतिदिन देती है, उनको 2.5 किलो ग्राम दूध हेतु और स्वस्थ रहने हेतु 2 किलो, इस प्रकार कुल 4.5 किलो ग्राम पशु आहार प्रतिदिन दें।
  • गर्भावस्था के अंतिम दो माह में 3 किलो प्रतिदिन संतुलित पशु आहार के अतिरिक्त 1 किलो अच्छी गुणवत्ता वाली खली की आवश्यकता होती है।

सामान्यत: धान और गेहूं के भूसे में पाचक प्रोटीन की मात्रा लगभग शून्य होती है। भूसे का यूरिया से उपचार करने से उसकी पौष्टिकता बढ़कर 4-5 प्रतिशत हो जाती है।

यह तथ्य सर्वविदित है कि पशुओं के स्वास्थ्य एवं दुग्ध उत्पादन हेतु हरे चारे का वर्ष भर उपलब्ध न होना एक बड़ी समस्या है। इसलिये पशुओं को संतुलित पशु आहार देना अत्यंत आवश्यक है।

भूसे में कुल पाचक पोषक तत्व की मात्रा लगभग 38-40 प्रतिशत होती है लेकिन जब भूसे की यूरिया से उपचारित किया जाता है तो इसकी मात्रा बढ़कर लगभग 48-50 प्रतिशत तक हो जाती है। पशुओं को सुचारू रूप से उपचारित चारा खिलाने पर उसको नियमित दिए जाने वाले पशु आहार में 30 प्रतिशत तक की कमी की जा सकती है।

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