रिलायंस फाउण्डेशन की किसानों को सलाह

  • सोयाबीन में सफेद सुंडी का प्रकोप देखा जा रहा है। यह कीट सोयाबीन की जड़ों को नुकसान पहुंचाकर सुखा देती है। इसके नियंत्रण के लिये जड़ों के पास क्लोरोपायरीफॉस 20 ई.सी. 1500 मिली प्रति हेक्टर छिड़काव करें जिससे कीटनाशक का घोल जमीन के अन्दर 2-3 इंच तक पहुंच सके।
  • तना छेदक कीट का प्रकोप देखा जा रहा है इसके बचाव के लिए फ्युराडान 4 जी 2-3 किलो ग्राम/हेक्टर का प्रयोग करें।
  • कपास में रसचूसक कीट के नियंत्रण हेतु थायोमेथोक्सम 0.25 ग्राम/लीटर या इमिडाक्लोप्रिड 0.5 मिली./लीटर पानी के साथ छिड़काव करें।
  • मूंगफली में नेक्रोसिस झुलसा व जड़सडऩ रोग बीमारी का प्रकोप देखा जा रहा है, इसके नियंत्रण के लिए कार्बेन्डाजिम 12 प्रतिशत+मेन्कोजेब 63 प्रतिशत का 3 ग्राम प्रति लीटर के हिसाब से छिड़काव करें।
  • धान में खरपतवार निकालने का कार्य करें तथा इसके पश्चात संतुलित मात्रा में नत्रजन उर्वरक का छिड़काव करें।

उद्यानिकी

  • भिन्डी, मिर्च, टमाटर, बंैगन में इस समय रसचूसक कीट की सम्भावना हो सकती है अत: नियंत्रण हेतु डाइमिथिएट 750 मिली दवा प्रति हेक्टेयर 500 से 600 लीटर पानी में घोल बनाकर 10-10 दिन के अन्तराल पर छिड़काव करें।
  • फल वृक्षों की रोपाई हेतु तैयार किए गये गड्ढों में पौधों की रोपाई करें व जल निकास की व्यवस्था करें। सब्जियों में खरपतवार नियंत्रण व पौध संरक्षण के उपाय करें।

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