अनिवार्य होता जा रहा नींदानाशकों का उपयोग

देश में खरपतवारों से फसलों को होने वाली हानि लगभग 33 प्रतिशत होती है जो कभी – कभी 75 प्रतिशत तक पहुंच जाती है। जबकि कीटों व रोगों से होने वाली हानि क्रमश: 26 व 20 प्रतिशत ही होती है। परंतु देश में पौध संरक्षण रसायनों में सबसे अधिक खपत कीटनाशकों की होती है जो कुल पौध संरक्षण रसायनों का 60 प्रतिशत है, जबकि सबसे अधिक हानि पहुंचाने वाले नींदा के नियंत्रण के लिये नींदानाशक की खपत मात्र 16 प्रतिशत ही है। फफूंदी नाशकों की खपत 18 प्रतिशत है जो नींदानाशकों की खपत से ज्यादा है। पिछले कुछ वर्षों में नीदानाशक के उपयोग में उतार – चढ़ाव देखने को मिले हैं। वर्ष 2011-12 में नींदानाशकों के टेक्निकल ग्रेड का उपयोग 6000.5 मीट्रिक टन तक पहुंच गया था, इसके बाद के वर्षों में इसके उपयोग में गिरावट देखी गई है। वर्ष 2015 -16 में देश में इसके 3543.2 मीट्रिक टन (टेक्निकल ग्रेड) का ही उपयोग किया गया। इसके कारणों पर विचार करने की आवश्यकता है। इसका मूल कारण फसल से नींदा निकालने के लिये मजदूरों की उपलब्धता का न होना है। नींदानाशकों का उपयोग अब किसानों को मजदूर न मिलने के कारण अनिवार्य होता चला जा रहा है। नींदानाशकों के उपयोग की अपनी जटिलतायें हैं। किसी भी फसल में नींदा के प्रकार की विविधता तथा बाजार में उपलब्ध नींदानाशकों की एक ही प्रकार के नींदा के नियंत्रण की विशिष्टता के कारण किसान के मन में इनके उपयोग के प्रति सदा भ्रम बना रहता है। नींदानाशकों की कीमत का अधिक होना तथा उनके सही समय व सही फसल अवस्था में उपयोग में होने वाली चूक की संभावना से भी किसान के मन में शंका बनी रहती है। बहुधा किसान नींदानाशकों के उपयोग में भी चूक कर जाता है। नींदानाशकों के नींदा के नियंंत्रण के परिणाम अनेक बातों पर निर्भर करते हंै। नींदानाशक की सही मात्रा के साथ-साथ स्प्रे पंप में लगने वाले नोजल, पानी का साफ होना, छिड़कने का तरीका, पानी की प्रति एकड़ मात्रा आदि। खरीफ फसलों में नीदा नियंत्रण के लिए बहुत से किसान खेत के पास के गड्ढों में वर्षा का मिट्टी मिले गंदे पानी का उपयोग अपनी सुविधा के लिये प्राय: नींदानाशक के छिड़काव के लिये उपयोग में कर लेता है जो कि उचित नहीं है, क्योंकि कुछ ऐसे नींदानाशक जैसे क्विजालोफॉस इथाइल हैं जो मिट्टी के कणों में संपर्क में आने पर निष्क्रिय हो जाते हैं। और यह नींदा नियंत्रण के सही परिणाम नहीं दे पाते हैं। आने वाले वर्षों में नींदा नियंत्रण के लिये नींदानाशकों का उपयोग एक अनिवार्यता होती जायेगी। अत: किसानों को इनके गुणों तथा सही उपयोग का प्रशिक्षण देना भी आवश्यक है ताकि किसान को इनके उपयोग का सही लाभ मिल सके।

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