धान में खरपतवार प्रबंधन

धान की फसल में खरपतवार नियंत्रण-
धान फसल में पाये जाने वाले प्रमुख खरपतवारों में सांवा, मोथा, जंगली धान, क्रेब घास, बंदरा बंदरी, दूब, जलकुंभी, हजारदाना, जंगली जूट प्रमुख हैं।
(अ) छिटकवां पद्धति एवं कतारों में बोइ जाने वाली धान के लिए –

शस्य विधियां-

  • क्रांतिक अवधि अर्थात् 20 से 30 दिनों में निंदाई करें।
  • जलमग्न कर – जलीय नींदा पानी निकालकर और उसे पुन: भरकर नियंत्रित किये जाते हैं।
    बियासी पद्धति अपनाकर – धान की बोआई के 30 से 35 दिनों बाद जलमग्न अवस्था में देशी हल द्वारा की जाती है। इससे धान का विरलीकरण हो जाता है और अनेक प्रकार के नींदा भी नष्ट हो जाते है।
  • कतारों में बोई जाने वाली धान में रोटरी वीडर या ताउचीगुरमा का उपयोग कर नींदा को नष्ट किया जा सकता है। इसको सुचारू रूप से चलाने हेतु खेत में पानी भरा रहना आवश्यक है।
    रसायनिक विधियां – आमतौर पर अपनाई जाने वाली सस्य क्रियाएं जैसे – निंदाई, गुड़ाई में मेहनत और समय अधिक लगता है। कई बार प्राकृतिक कारणों से अथवा कृषि मजदूर न मिलने के कारण उचित समय से निंदाई नहीं हो पाती। ऐसी स्थितियों में निम्न रसायनिक दवाओं का उपयोग कर नींदा नियंत्रण कर सकते हैं।
    खरपतवार प्रकृति के अनुसार जैसे सावां व अन्य घासकुल के खरपतवारों के लिए ब्यूटाक्लोर या थायोबेनकार्ब तथा चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों की अधिकता होने पर 2, 4-डी का उपयोग करें। मोथा के साथ-साथ चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों की अधिकता होने पर क्लोरिम्यूरान -मेटासल्फ्यूरान के साथ हिृप सुपर मिश्रण का उपयोग करें।
    रोपाई वाली धान में नींदा नियंत्रण- शस्य विधियां-
  • रोपाई के पहले खेत की उचित तैयारी करें, इसके लिये जलमग्न खेत में खड़ी व आड़ी जुताई करें एवं पाटा का उपयोग कर खेत को अच्छी तरह मचायें।
    रसायनिक विधियां – सारणी में दिये गये रसायनिक दवाओं का उपयोग करें।
    प्रयोग करने की विधि-
  • खरपतवारनाशी रसायनों की आवश्यक मात्रा को 500-600 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर की दर से समान रूप से छिड़काव करें।
  • रोपाई वाले धान में खरपतवारनाशी रसायनों की आवश्यक मात्रा को 60 कि.ग्रा. सूखी रेत में अच्छी तरह से मिलाकर रोपाई के 2-3 दिन के बाद 4-5 से.मी. खड़े पानी में समान रूप से बिखेर दें। धान की फसल में मुख्यत: सभी प्रकार के खरपतवार (जैसे – घासकुल, मोथाकुल एवं चौड़ी पत्ती वाले) पाये जाते हैं। इसलिए एक ही शाकनाशी का लगातार प्रयोग करते रहने से कुछ विशेष प्रकार के ही खरपतवारों की रोकथाम हो पाती है तथा दूसरे प्रकार के खरपतवारों की संख्या में लगातार वृद्धि होती रहती है तथा कुछ समय बाद यही दूसरी प्रकार के खरपतवार मुख्य खरपतवार के रूप में उभर आते हैं। ऐसी परिस्थितियों में विभिन्न प्रकार के शाकनाशियों का मिश्रण करके छिड़काव करने से खरपतवारों का प्रभावी नियंत्रण किया जा सकता है।
    विशेष –
  • उपचार के समय पानी निकालना आवश्यक है।
  • उपचार के 4 से 6 दिन बाद खेत को जलमग्न करें। करीब 10 से.मी. जल सतह निरंतर बनाये रखें।
खरीफ मौसम में खरपतवारों का शुरूआत से ही अधिक प्रकोप होता है। खरपतवार फसलों के साथ-साथ प्रकाश, मृदा जल, पोषक तत्वों तथा वायु के लिये प्रतिस्पर्धा कर उसकी उपज में भारी कमी करते हैं। फसलों को हानि पहुंचाने वाले व्याधियों जैसे-कीट, रोग, चूहा, सूत्रकृमि की अपेक्षा खरपतवारों द्वारा फसलों को सर्वाधिक हानि होती है। विभिन्न व्याधियों द्वारा कृषि उत्पादों के कुल वार्षिक हानि में खरपतवारों द्वारा 45 प्रतिशत, कीटों द्वारा 30 प्रतिशत, रोगों द्वारा 20 प्रतिशत तथा अन्य कारकों द्वारा 5 प्रतिशत हानि होती है। अलग-अलग क्षेत्रों की परिस्थितियों विशेषकर वर्षा के वितरण के अनुसार विभिन्न विधियों का समावेश कर समन्वित खरपतवार प्रबंधन करें।
 धान में प्रयोग किये जाने वाले विभिन्न खरपतवारनाशी रसायन, मात्रा, समय एवं विधि का विवरण
रसायन   
 
व्यापारिक नाम तथा फारमुलेशन मात्रा सक्रिय तत्व प्रति हेक्टेयर मात्रा ग्राम /मि.ली. 
 प्रति हेक्टेयर
प्रयोग का समय
धान की नर्सरी
प्रेटिलाक्लोर/ सैफ्नट सौफिट 50 प्रतिशत ई. सी. केरेज 50 प्रतिशत/ई.सी. 500 1000 बोआई के 2-3 दिन के अन्दर
ब्यूटाक्लोर मचैटी 50 प्रतिशत ई.सी. फास्टनिक्स 50 प्रतिशत ई.सी. 750 1500 बोआई के 2-3 दिन के अन्दर
सीधी बुवाई वाले तथा रोपित धान
ब्यूटाक्लोर मचैटी 50 प्रतिशत ई.सी. फास्टनिक्स 50 प्रतिशत ई.सी. 1000-1500 2000-3000 बोआई/रोपाई के 2- 3  दिन के अन्दर
पेन्डीमिथालीन स्टॉम्प-30 प्रतिशत ई.सी. 750-1000 2500-3300 2-3 दिन के अन्दर
एनिलोफॉस एरोजिन या एनिलोगार्ड 30 प्रतिशत ई.सी. 400 1200 2-3  दिन के अन्दर
आक्साडायाजान रोनस्टार – 25 प्रतिशत ई.सी. 500 2000 3 दिन के अन्दर
आक्सीफलोरफेन गोल 23.5 प्रतिशत ई.सी., औकसीगोल 23.5 प्रतिशत ई.सी 250 1000 3 दिन के अन्दर
आक्साडायग्रिल टापस्टार 80 प्रतिशत डब्ल्यू.पी. 90 100 3 दिन के अन्दर
प्रेटिलाक्लोर रिफिट/सीफिट 50 प्रतिशत ई.सी. 750-1000 1500-2000 3 दिन के अन्दर
फेनाक्साप्रोप व्हिपसुपर 10 प्रतिशत ई.सी,प्यूमासुर 10 प्रतिशत ई.सी. 80 800 25-30 दिन पर
साइहालोफोप ब्यूटाइल क्लिचर 10 प्रतिशत ई.सी. 60-80 600-800 10-20 दिन पर
पाईराजो सल्फ्यूरान ईथाइल साथी 10 प्रतिशत डब्ल्यू पी. 25 250 10-20 दिन पर
2-4 डी.ई.ई. बवंडर 38 प्रतिशत ई.सी. 500 1500 20-25 दिन
2-4-डी सोडियम लवण बीडमार 80 प्रतिशत डब्ल्यू. पी. 750 900 20-25 दिन
ईथेक्सीसल्फ्यूरान सनराईस 15 प्रतिशत डब्ल्यू. पी. 30 200 20-25 दिन
बिसपाईरीबेक सोडियम नौमिनीगोल्ड 10 प्रतिशत एस.सी. 25 250 20-25 दिन
  • डॉ. बीरबल साहू
  • देवचन्द सलाम
  • इंजी. अतुल डांगे
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