खेती का प्राण बीज

अच्छा बीज कौन है?

  • अच्छा बीज सही किस्म का होता है। उसमें दूसरी किस्मों की मिलावट नहीं होती। उससे उगाई फसल में सभी पौधे समान आकार व गुण वाले होते हैं।
  • अच्छे बीज में फालतू चीजों और खरपतवार के बीजों की मिलावट नहीं होती। वह साफ-सुथरा होता है। रेत, कंकड, पत्थर, तिनके, फूस, कटे-टूटे बीज से मुक्त होते हैं।
  • अच्छा बीज सही आकार का व तंदरुस्त होता है। भरे-पूरे तंदरुस्त दाने में भरपूर भोजन जमा होता है। पूरा भोजन मिलने से पौधे भी शुरू से ही तदुरूस्त रहते हैं। तंदरुस्त पौधे ज्यादा उपज देते हैं। सिकुड़े अधपके बीज कमजोर होते हैं।
  • अच्छे बीज रोगी नहीं होते। उनमें फफूंद नहीं लगा होता। उन्हेें रोगी पौधे फसल से इकट्ठा नहीं किया जाता। उन्हें भंडार में भी रोगों से बचाया जाता है।
  • अच्छे बीज का जमाव बहुत अच्छा होता है। इससे खेत में पौधों की संख्या कम नहीं होने पाती और भरपूर उपज मिलती है।
  • अच्छा बीज अधिक पुराना नहीं होता। उसमें अंकुरण की पूरी ताकत मौजूद रहती है। पुराना बीज बदरंग हो जाता है जबकि नया बीज चमकदार होता है। अच्छा बीज अच्छी खेती की शुरुआत है।

 

 

बीज कुदरत का करिश्मा है। अपनी छोटी सी काया में एक पूरा पौधा छुपाए। माटी यदि मॉ है तो बीज प्राण है खेती का। बीज फसल उत्पादन का प्रमुख आदान है। खेती की शुरुआत बीज से ही होती है। इसलिए बीज का बढिय़ा होना जरुरी है। बीज जो अंतिम रुप से हमें प्राप्त होता है वह केवल संसाधन और अच्छे भंडारण का ही परिणाम ही नहीं, वरन फसल के उगाने के ढंग व बीज फलों में से बीज निकालने के तरीकों पर भी निर्भर करता है। कटाई के समय आंतरिक रुप से क्षतिग्रस्त होने पर भंडारण में बीजों का अंकुरण अधिक समय तक नहीं बनाये रखा जा सकता है। इसलिए बीज उत्पादन के लिए बीजों की बुआई से लेकर उनको वितरण के लिए तैयार करने की सभी प्रवृत्तियों पर अच्छी तरह ध्यान देना आवश्यक है।

अच्छे और प्रमाणित बीज के लक्षण आनुवांशिक शुद्धता
बीजों में आनुवांशिक शुद्धता होनी चाहिए, जिसका अर्थ है बीज उसी किस्म के हो जिनके नाम पर उनहें लिया जा रहा है एवं उसमें किसी दूसरी किस्म के बीज मिले हुए न हों। इसलिए ऐसी फसलों का केवल प्रमाणित बीज किसी विश्वसनीय एजेंसी अथवा बीज विक्रेता से लें।

 

 

भौतिक शुद्धता
बीज में खरपतवारों एवं दूसरी फसलों के बीज नहीं मिले हों। यह भी आवश्यक है कि उनमें कंकड-पत्थर, मिट्टी इत्यादि नहीं मिले हों। फसलों के बीज के साथ खरपतवार उग आते हैं और फसल के प्रतियोगी बन जाते हैं।

परिपक्वता
बीज पूर्ण रुप से परिपक्व हों क्योंकि अपरिपक्व बीजों का अंकुरण कम होता है। इस कारण फसल की कटाई तब करनी चाहिए, जब उसमें शरीर क्रियात्मक परिपक्वता आ गई हो। इस समय बीज में अधिकतम पोषक पदार्थ एकत्रित होता है, अर्थात् उसका शुष्क भार अधिकतम होता है।

आयु
बीज उसी साल का उत्पन्न किया हो। यदि बीज पुराना हुआ तो उसकी जीवन क्षमता तथा बीज-ओज कम हो जायेगा। फलत: उसका अंकुरण कम होगा, जिससे खेत में अनुमोदित पौध संख्या कम हो जायेगी और उपज कम प्राप्त होगी।

अंकुरण-क्षमता
बीजों में अंकुरण की उच्च क्षमता एक आवश्यक गुण है। बीज अंकुरण क्षमता 80 प्रतिशत से कम नहीं हो। बोआई के पूर्व बीजों की अंकुरण क्षमता की जांच कर लें।

जीवन क्षमता
यदि बीजों में जीवन क्षमता नहीं हुई तो उनका अंकुरण कम एवं असमान होगा जिससे उत्पादन घट जायेगा। इसलिए यह आवश्यक है कि जो बीज चुना जाए, वह उच्च जीवन क्षमता वाला हो।

रंग, आकार तथा आकृति में समानता
बीजों को पुष्ट और सुडौल होना चाहिए। सिकुड़े एवं छोटे आकार के बीज या तो रोगग्रस्त होते है अथवा अपरिपक्व। बीज के रंग, आकार, आकृति में समानता का अर्थ है बीज शुद्ध और अच्छा हो। सीडड्रिल से बोआई के लिए बीज का एक आकार का होना आवश्यक है।

प्रसुप्ति
अंकुरण की सभी अनुकूल दशाएं रहने पर भी बीज नहीं अंकुरता है। उस अवस्था को प्रसुप्ति कहते है। बीज को प्रसुप्ति-अवस्था के बाद या उनकी प्रसुप्ति नष्ट करके ही बोना चाहिए।

  • डॉ. विजय कुमार जैन
    मो. : 9179301774
Share On :

Follow us on

Subscribe Here

For More Articles

Releated Articles